in your 20s? watch this before 2025
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> 文章要点:
> - 20岁时的错误总结,避免重复同样的错误。
> - 个人成长与职业发展经历分享。
> - 强调风险与机遇的重要性,勇敢面对。
> - 花时间提升自己,关注人际关系和心理健康。
> - 学会享受生活中的小事,积极面对生活中的挑战。
20 मिस्टेक्स जो मैंने अपने 20 में करी और मैं नहीं चाहता कि आप भी वो रिपीट करो अब भाई मैंने अपनी टीनएज में जो गलतियां करी थी और उससे जो लेसंस मिले थे वो मैंने आपको क्लियर बताए थे टीनेज मिस्टेक्स वाली वीडियो में लेकिन क्योंकि एनीवे मैक्सिमम ऑडियंस 20 इयर्स या उससे ऊपर की है और साथ में मेरी भी 20 बहुत जल्दी खत्म हो जाएंगे तो उससे पहले मैं आपकी पूरी हेल्प करना चाहता हूं कि आप अपने 20 बेस्ट तरीके से निकाल पाओ देखो आप भी कुछ गलतियां तो करोगे लेकिन एटलीस्ट वो गलतियां तो मत करो जो मैंने कर चुका हूं।
तो व्हाट्स अप ब्रो वेलकम वेलकम बैक टू बी योर बेस्ट इंडिया का कूलेस्ट सेल्फ इंप्रूवमेंट चैनल हां मैं सैन कालरा वीकली दो वीडियोस डालता हूं फैशन स्किन केयर पर्सनालिटी एंड सेल्फ इंप्रूवमेंट पे तो चलो भाई शुरू करें।
बट भाई आप में से जो भी न्यू है वो ये सोच रहा होगा कि भाई इस बीकेएल की सुने क्यों हम क्योंकि आजकल के इंटरनेट और सोशल मीडिया के जो पूरा एनवायरमेंट है उसमें बात तो यही है ना कि सिस्टम ही यही है कि कोई भी ब्रोक लौंडा जिसने लाइफ में कुछ उखाड़ने के नाम पर सिर्फ 100 केजी के बेंच प्रेस मारे हैं और ना पैसे कमा रहा है ना कुछ इंपैक्टफुल या मीनिंगफुल कर रहा है लाइफ में ना कोई बंदी ढंग से पटा रहा है वो आके किसी को भी इंटरनेट पे कुछ भी बोल हो सकता है।
तो मैं बस अपने उस प्यारे भाई को बताना चाहता हूं ब्रीफ अपनी जर्नी अगर आप ऑलरेडी सब्सक्राइब्ड हो तो आप ये पार्ट स्किप कर सकते हो क्योंकि नहीं तो आपको रिपीटिटिवली थोड़ा शो ऑफ भी लग सकता है जो कि मेरा मोटिव बिल्कुल भी नहीं है।
तो भाई मेरे 20 में मैंने अपनी बीटेक कंप्लीट करी आईआईटी दिल्ली से फिर उसके बाद एक मैनेजमेंट कंसल्टेंसी में मेरी जॉब लगी व्हिच इज वन ऑफ द बेस्ट जॉब्स जो होती है। फिर वहां से मैंने कॉर्पोरेट एनवायरमेंट छोड़ के करियर रिस्क ली और मैं गया एक स्टार्टअप में वो भी मीडिया स्टार्टअप में। फिर वो भी 2 साल करने के बाद मैंने बिल्कुल ही नौकरी छोड़ दी विदाउट अ क्लू कि मैं लाइफ में क्या करूंगा और उसके बाद कुछ ही महीने में एक हाईली प्रॉफिटेबल बिजनेस खड़ा कर दिया।
लेकिन उसके बाद भी मेरी भूख खत्म नहीं हुई तो एक क्लोथिंग ब्रांड भी बना दिया जो कि इस टाइम पे इंडियाज वन ऑफ द मोस्ट फेमस ब्रांड्स हैं। तो चलो ये तो आप कहोगे बस प्रोफेशनली सक्सेस की तो बात कर रहे है। ये तो उसके अलावा मैं आपको बता दूं कि मैं घर पे रहता हूं मां-बाप के साथ घर के लिए भी प्रोवाइड करता हूं मतलब अपना पार्ट देता हूं। साथ में पापा को गाड़ी दिलवा दी, मम्मी के लिए घर पे लिफ्ट लगवा दी और हर शाम को 5:00 बजे उनके साथ चाय भी पीने जाता हूं।
लेकिन अब कुछ लोग कहेंगे कि भाई फैमिली फैमिली से हमें उतना लेना देना नहीं है तो हमारे लिए तो ये कुछ भी नहीं है। तू प्रोफेशनली के अलावा ये बता तेरा नेटवर्क कैसा है。तो मेरे दोस्त भी वन ऑ द मोस्ट सक्सेसफुल पीपल है प्लस आई एम आल्सो एन इन्वेस्टर इन मल्टीपल कंपनीज।
तो उसकी वजह से मेरा नेटवर्क इन द प्रोफेशनल स्फीयर आल्सो इतना बड़ा और अच्छा हो चुका है बेस्ट फाउंडर्स ऑफ इंडिया का। एंड ये सब सुनके कहोगे भाई ये तो बस हसल एफर्ट टॉक्सिक हसल कर रहा है तू ये वो ये वो मेंटल हेल्थ का क्या हो ये सब।
तो भाई मैं सोलो ट्रेवल करता हूं वो भी यूरोप में। स्वीडन चला गया मैं पिछले दो-तीन साल की बात है। स्वीडन चला गया एक महीने के लिए, स्पेन चला गया एक महीने के लिए, ऑस्ट्रिया चला गया ऑलमोस्ट एक महीने के लिए। यहां तक कि मम्मी पापा की पहली यूरो ट्रिप भी करवा दी।
बट एनीवे मेरा पर्पस भाइयों की हेल्प करना है। मेरा पर्पस शो ऑफ करना नहीं है। हाथ जोड़ के बोल रहा हूं कि ये बिल्कुल भी शो ऑफ नहीं था।
प्लस मुझे अपनी बारे में पॉजिटिव बातें यहां पे सोशल मीडिया पे करके थोड़ी सी क्रिंज उल्टी आ रही है। अब मैं अपनी गलतियां बताना शुरू करता हूं और ये वो गलतियां है जो काश मैं अपने 20 ईयर ओल्ड सन कालरा को जाके बता पाता कि भाई मत कर। मतलब किसी तरीके से बता पाता हू।
बस उसमें सबसे पहली वाली गलती तो मेरी सबसे बड़ी गलती है मतलब इससे बड़ी गलती शायद मैंने लाइफ में कभी नहीं करी। अब देखो रिग्रेट नहीं रखता मैं उस चीज का सिर्फ इसलिए ये कि भाई जहां पे अभी हूं वो भी बढ़िया है।
तो क्यों दुखी होना रिग्रेट करके वो उस रीजन से मैं रिग्रेट नहीं रखता बट अगर यह गलती मैंने नहीं करी होती तो भाई कहां होता भाई। क्या मतलब शानदार लाइफ हो चुकी होती।
ये गलती ये है कि मैंने अपनी लाइफ में रिस्क बहुत लेट लिया है और ऑनेस्टली ये सिर्फ एक बार की बात नहीं है। मैंने लाइफ में जब भी रिस्क लिया है ना वो बहुत ही लेट लिया है बहुत ही डर डर के लिया है। मैं ना पहले से ही अब थोड़ा सा इंप्रूव हुआ हूं बट पहले से मैं बहुत डरपोक इंसान रहा हूं।
ठीक है मेरे बचपन में मुझे डरना ही सिखाया गया है। अब मैं यहां पर अपने मां-बाप को ब्लेम नहीं कर रहा भाई वो भी एक तरीके की कंडीशनिंग से आए हैं तो उनकी गलती नहीं है इस चीज में।
बट दिक्कत सिर्फ ये है कि मेरी एनवायरमेंट हमेशा ऐसी रखी गई है कि मुझे डर डर के ही जीना है।
तो उसकी वजह से ना मैं बहुत लेट अपनी लाइफ में सारे डिसीजंस लिए। फॉर एग्जांपल, मैं जब अपनी पहली जॉब में था मुझे वहां पे 2 साल शायद नहीं रुकना चाहिए था। मुझे वहां पे 6 महीने पहले ही निकल लेना चाहिए था। डेढ़ साल रुकना चाहिए था मैक्सिमम सिर्फ इसलिए कि डरता था कि अब क्या करूं।
मैं हजार टाइप के ग्राफ चार्ट बना के अपनी मम्मी से डिस्कस करता था कि मम्मा ऐसे कर लूंगा वैसे कर लूंगा।
मेरी मम्मी हमेशा मुझे सेफ ऑप्शन लेने के लिए बोलती थी और मेरी फटी रहती थी। बिल्कुल मेरे अंदर हिम्मत ही नहीं थी कि मैं खुद से कुछ स्टेप ले पाऊं।
और उसके बाद जब मैंने नौकरी छोड़ दी, जब दूसरी नौकरी में गया अपनी मीडिया कंपनी वाली, वहां पर भी एक साल बाद मुझे निकल ही जाना चाहिए था। क्योंकि मेरे को अंदर से फीलिंग आ गई थी कि यह जगह मेरे लिए नहीं है और मैंने पहले भी डिस्कस किया हुआ है कि वो जगह में क्या-क्या दिक्कतें थी जो मुझे फील फील हुई।
अ तो वहां से भी निकलते निकलते मेरे को एक साल मैंने सिर्फ सोचने में निकाल दिया। एक पूरा साल। इतना डरपोक फट्टो इंसान था मैं।
और जब वहां से भी निकला और वो भी ऐसे नहीं निकला कि मेरे दिमाग में कोई प्लान था। व्हिच इज द राइट वे टू क् क्विट योर जॉब। कि तुम्हारे दिमाग में कोई प्लान होना चाहिए। ये तो बहुत ही बड़ी गलती करी थी मैंने कार्ड जब मैं वहां से निकला मैं बस ऐसे ही छोड़ दी नौकरी क्योंकि मेरे से हो ही नहीं रहा था।
अब वहां पे मेरे पास और कोई ऑप्शन भी नहीं था क्योंकि मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गया था वहां पे उस एनवा में। उस तरीके की लाइफ जी के मैं और मतलब बिल्कुल मैं आपको बता नहीं सकता कि ऐसे बेड पर लेटा रहता था तो मेरे से हाथ भी नहीं हिलता था।
मैं इतना दुखी हो चुका था, इतना, मेरी बॉडी का एक एक सेल डिप्रेसो दी कि भाई अगर यह कंटिन्यू करा तो तो मैं खत्म हूं भाई।
तो पता नहीं मैं क्या ही कर लूंगा अपने आप को। मैं वो वर्ड नहीं बोल सकता यहां पे डी मोनेटाइज हो जाऊंगा। एक्चुअली मतलब स्ट्राइक ही आ जाएगी।
मतलब एनीवे तो उस टाइम प मैंने इसलिए छोड़ दी। उसके बाद धीरे-धीरे मुझे रिलाइज हुआ कि मुझे क्या पसंद है। तब मुझे पता लगा भाई साहब youtube2 करी थी।
मुझे यह लगता था कि मैं अगर youtube4 उ भी अगर कमा सकता हूं तो दैट इज ग्रेट। मतलब मैं मैं जिंदगी बर यही लाइफ जीना चाहता हूं। क्योंकि ओबवियसली ब्रो तुम अगर कुछ अपनी पसंद का कर रहे हो ना तुम पैसों के बारे में उतना ना नहीं सोचते।
लेकिन यहीं पे अगर मैंने अपनी नौकरी जब सोचा था तब छोड़ दी होती, एक साल पहले अगर मैंने 2021 जुलाई में अपना रेजिग्नेशन डालने की जगह 2020 जुलाई में अपना रेजिग्नेशन डाला होता तो कोविड टाइम पे मैं कंटेंट शुरू करता।
और अगर मैं कोविड टाइम पे कंटेंट शुरू करता तो आपको पता है जो जो लोगों ने कोविड के टाइम पे कंटेंट क्रिएशन शुरू करा था वो कहां है। तो आप देख चुके हो वो यूट्यूब। आप देख चुके हो वो आता है कि क्या पता मैं उतने कम प्रेशर में छोड़ देता और बिल्कुल डिप्रेशन की हालत में नहीं छोड़ता।
तो शायद मेरे अंदर की आग ही नहीं जलती कंटेंट बनाने की। ये भी बोला जा सकता है बट मैं तो आपको बता रहा हूं कि एक गलती तो डेफिनेटली ये थी कि मैं बहुत डरपोक था और मेरे से वो बिजनेस रिस्क लिया ही नहीं जा रहा था।
और मैं सिर्फ ये सोचता रहता था कि व्हाट इफ। क्या भाई क्या पता सब बर्बाद हो जाए। क्या पता मैं मेरे सारे पैसे गुम मतलब खत्म हो जाए। क्या पता लोग मेरे को इज्जत ना दें।
क्या पता मम्मी पापा मुझे घर से बाहर निकाल दें। क्या पता ये नेगेटिव, क्या पता वो नेगेटिव। मैंने ये ही नहीं सोचा भाई क्या पता सब बढ़िया चल जाए।
क्या पता मैं क्रेजी जगहों पर ट्रेवल करने का मौका मुझे मिल रहा हो। क्या पता मैं बेस्ट जगहों प खा पी रहा हूं।
क्या पता मुझे अपना ब्रांड शुरू करने को मिल जाए। क्या पता मैं दूसरे ब्रांड्स में इन्वेस्टर एंजल इन्वेस्टर बन जाऊं। भाई यह तो वर्ड ही नहीं सोचा था मैंने कभी।
तो मेरी रिक्वेस्ट सिर्फ मेरे 20 वाले भाइयों से सिर्फ इतनी है घंटा फर्क नहीं पड़ता ब्रो प्लीज गो फॉर इट। क्योंकि भाई फेलियर का जो दुख है ना वह आपको सिर्फ दिन में फील होगा।
लेकिन रिग्रेट का दुख आपको रात को सोने नहीं देगा। क्योंकि आपको ना यह नहीं समझ आ रहा है कि टाइम एज अ रिसोर्स इज इनफाइनों। एंड आजकल के जमाने में मनी लॉस से तो डरना भी नहीं चाहिए।
यार आप कोई भी स्किल सीख के कभी भी वापस मनी कमा सकते हो। और लोग क्या कहेंगे वाली चीज से डरने वाली चीज। तो देखो लोग तो कहेंगे ही।
मैं तो उस चीज में मानता ही नहीं कि लोग नहीं कहेंगे। कुछ और कर दो तुम, स्टेप ले लो लोग कुछ नहीं कहेंगे।
अरे लोग तो कहेंगे ही, तुम अच्छा भी करोगे तो भी कहेंगे, तुम बुरा भी करोगे तो भी कहेंगे। भाड़ में जाए लोग। तुम ये सोचो कि एक लड़का जिससे मैं हर चीज में 10 टाइम्स ऊपर हूं, वो आके मेरी रील पे ये कमेंट कर सकता है कि भाई तू ओवर एक्टिंग क्यों कर रहा है।
साले, तो मतलब लोग तो कभी भी कुछ भी कहेंगे ना और सोशल मीडिया की वजह से तो लोग के पास एक्सेस भी हो गया कभी भी कुछ भी बोल देने का।
अब मुझे कोई फर्क थोड़ी ना पड़ रहा है उसके कमेंट से। मैं तो उसका कमेंट देखते ही मेरे दिमाग में पहला थॉट ये आया कि हां, इसके बारे में youtube's के ऊपर भी सेम ही गलती कर दी।
मतलब ये इकलौती मैंने इस गलती को सबसे बड़ी गलती क्यों बोला अपनी क्योंकि मेरे पूरे 20 में भी मैं इसको सुधार नहीं पाया। अब शायद 30 में ही सुधार हंगा, एक दो साल बाद।
और वो मैंने गलती रिपीट ऐसे करी कि अर्बन ईड्स में भी मेरी फटती रही। कि मैं कितना ऑर्डर प्लेस करूं? कितना इन्वेस्टमेंट डालूं उस ब्रांड में। कि मैं उतने कपड़े बनवा पाऊं जिनको मैं बेच दूं।
भाई हर बार हम लोग स्टॉक आउट रहते हैं। यार मैं तो बहुत ही बड़ा फट्टू निकला भाई। मैं अभी तक ये गलती ठीक नहीं कर पाया बट यस आई हैव प्रॉमिस माइसेल्फ कि मैं ये गलती अपनी ठीक करूंगा।
मैं और बड़े रिस्क लूंगा। एनीवे चलते हैं नेक्स्ट गलती पे यार। जब मैं अपनी कॉर्पोरेट एनवायरमेंट में था तब तक मैंने गलती बहुत बार करी है। जिस भी इंसान से मैं अपना दोस्ती तोड़ना चाहता था या रिलेशन तोड़ना चाहता था, चाहे प्रोफेशनल हो चाहे रोमांटिक हो, मैं हमेशा उस चीज को ना सबसे घटिया तरीके से करता था।
मतलब कि मैं अपने ब्रिजे बर्न कर देता था बिल्कुल। मतलब लड़ाई होके ही निकला हूं। मैं मतलब जो मेरी पहली जॉब थी, उसके अंदर वी यूज टू गेट प्रोजेक्ट्स।
तो एक उसी जॉब के अंदर हम अलग-अलग क्लाइंट्स के लिए छछ महीने, आठ-आठ, 1010 महीने के प्रोजेक्ट्स करते होते थे। तो वहां पे मैं रियलाइफ करता था यार, जब तक पूरा प्रोजेक्ट चलता है।
मतलब प्रोजेक्ट के फर्स्ट डे से लेकर प्रोजेक्ट के लास्ट डे तक अगर 10 लोग इंवॉल्वड हैं उस प्रोजेक्ट में फ्रॉम माय कंपनी। और मान लो अ इंक्लूडिंग मतलब जो भी क्लाइंट की तरफ से भी पांच मेरी कंपनी से इवॉल्वड, पांच क्लाइंट की तर कंपनी से इवॉल्वड।
तो टोटल 10 लोग इवॉल्वड हैं प्रोजेक्ट के एंड तक। उसमें से 10 में से आठ लोगों को मैं पसंद नहीं था। तो मतलब मेरा लोगों से रिलेशंस बनाने का जो स्किल था वो इतना जीरो था। किसी को मैं कभी पसंद ही नहीं आता था।
और उस टाइम में मुझे रिलाइज नहीं होता था कि इसका रीजन क्या है। मेरे को बाद में समझ आया कि यार मेरे अंदर जीरो एंपैथी, जीरो सिंपैथी, जीरो इमोशनल इंटेलिजेंस है। जीरो।
मतलब मैं कोई मुझे कुछ बताता है, मैं सामने वाले के इमोशंस ही फील नहीं कर सकता। और इसी रीजन से मेरी कभी किसी इंसान से बहुत अच्छी बनी ही नहीं।
इवन आउटसाइड वर्क, मेरे जितने भी दोस्त थे, उनसे भी कभी मैं इमोशनली अटैच ही नहीं हो पाया। इन द सेंस कि मैं उनको समझूं। क्योंकि मेरे अंदर दूसरे के इमोशन समझने की कैपेबिलिटी ही जीरो थी।
अगर मुझे सही टाइम पर रियलाइफ बिलिटी पर काम कर लेता। लेकिन दिक्कत यह है कि जब मैं वो चार साल नौकरी कर रहा था, मुझे कुछ भी रिलाइज नहीं हुआ अपने बारे में।
क्योंकि मैंने सेल्फ इंट्रोस्पेक्शन ही नहीं करी। मैं सेल्फ अवेयर ही नहीं था। मैंने समझा ही नहीं कि मैं अंदर से किस टाइप का इंसान हूं। और इसी रीजन से मेरा कोई नेटवर्क ही नहीं बन पाया।
तब उस टाइम से मेरे पास कोई भी एक इंसान नहीं है जिसको मैं अभी रीच आउट कर सकता हूं, कोई भी हेल्प के लिए। एक भी नहीं, दोस्त भी नहीं। उस टाइम प जो दोस्त भी बने ऑफिस के बाहर, उनसे भी मतलब भाई मेरे को नाम ही नहीं याद किसी के।
मुझे याद ही नहीं कौन दोस्त बने थे। तो इतना गंदा ई क्यू नहीं होना चाहिए किसी भी 20 वाले इंसान का। मुझे पता है कि स्टार्टिंग में बहुत जवानी का खून होता है लड़कों में और हमें लगता है कि भाई अबे क्या फर्क पड़ता है।
जिसको आना है, आए दोस्त बने नहीं तो जाए। ऐसा नहीं होता ब्रो। नेटवर्किंग इज एन एक्टिव थिंग। ये आपको एक्टिवली करना पड़ता है।
लेकिन फिर जब भी मैंने गलती कर दी अपनी जॉब में। उसके बाद, जॉब छोड़ने के बाद जब मैं थोड़ा सा सेल्फ अवेयरनेस से काम किया अपने खुद की मेंटालिटी पे काम किया।
तब मेरे को रिलाइज हुआ इसका रीजन ये था कि मैं दूसरों के इमोशंस इसलिए नहीं समझ पाता था। क्योंकि मैं अपने इमोशंस नहीं समझता था। और जो इंसान अपने इमोशन नहीं समझ सकता, वो तो दुनिया में किसी के भी इमोशन नहीं समझ सकता भाई।
फिर मैंने सबसे पहले अपने इमोशन समझने शुरू करें। अपने आपके ऊपर काम करना शुरू किया। इस चीज के बारे में पढ़ाई करी। ऐसा नहीं, बैठे-बैठे नहीं समझ आएंगी चीजें।
इस चीज के बारे में पढ़ना पड़ता है, बुक्स पढ़नी पड़ती है। मैंने बुक्स नहीं पढ़ी, मैंने ऑनलाइन रिसोर्सेस पड़े बस। बट उन चीजों से मुझे काफी कुछ समझ आया अपने बारे में।
और फिर अब मैं लोगों के बारे में समझ पाता हूं। अब जब मैं लोगों से बात करता हूं, जब मेरा मन होता है कि मैं इससे अच्छे से बात करूं।
तब वो इंसान मुझे मेरे से कनेक्ट करता है, फिर वो इंसान मेरे को याद रखता है। और अब मेरा नेटवर्क बहुत अच्छा हो चुका है।
बट मैं आपको ये क्लियर बताना चाहता हूं कि अपनी ईगो की वजह से किसी से ब्रिजे बर्न करने की जरूरत नहीं है। अगर आपका मैनेजर आपको बहुत परेशान करता है, तो भी निकलते हुए उस कंपनी से।
जब आप क्विट कर रहे हो या फिर वो प्रोजेक्ट छोड़ रहे हो, तब अपने मैनेजर से लड़के आके अपनी ईगो सेटिस्फाई करके आपको लाइफ में कुछ भी नहीं मिलेगा।
बल्कि आगे के लिए आप प्रॉब्लम्स ही क्रिएट कर रहे हो। जो आपको लगता है ना कि मेरे को तो सेटिस्फैक्शन मिलना चाहिए। ना, मैं अपनी मन की शांति के लिए उसको गालियां सुना के आऊंगा।
आपको मन की शांति फील होगी उस टाइम पे, लेकिन कुछ टाइम बाद आपको रिलाइज होगा कि आपने गलत किया।
और गलत से आते हैं नेक्स्ट मिस्टेक पे। मैंने आपको मेरी टीनएज मिस्टेक्स वाली वीडियो में बताया था कि मैंने कॉलेज में सिगरेट बहुत स्मोक करी थी।
बट उसके तब मैंने कॉलेज में ही वो चेन स्मोकिंग करी थी। उसके बाद चेन स्मोकिंग नहीं करी मैंने।
बट उसके बाद कई बार ऑफिस में ऐसा होता था कि ऑफिस वाले लोगों के साथ नेटवर्क करने के लिए इवन व्हेन आई वास 23 24 मैं जाता था उनके साथ स्मोक करता था।
कभी-कभी वो फेकिंग माउथ फैग कर लेता था। और उस टाइम पे मुझे ऐसा लगता था कि यही इकलौता तरीका है ऑफिस वालों से, मैनेजर से अच्छे से बना के रखने का।
बट ओबवियसली मैंने रेगुलर नहीं करी। बहुत ऑन ऑफ वाली चीज थी। जब भी ऐसा लगता था कि अभी रिलेशन बनाने हैं किसी से, तब उसके साथ जाके कर लिया।
फिर जब कोविड आ गया, तब तो कोई ऑफिस नहीं जा रहा था। तो तब तो ओबवियसली बिल्कुल ही छोड़ दी। उसके बाद तो मैंने नौकरी ही छोड़ दी।
तो उसके बाद तो जरूरत नहीं थी किसी के साथ सोशली ये चीज करने की। तो वो प्रॉब्लम तो सॉल्व हो गई।
बट उसके बाद आई एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम जो कि एक जेंज एपिडेमिक है। एक तरीके से मतलब आप दिल्ली में बाहर निकलोगे भाई।
एक बच्चा ऐसा नहीं दिखेगा मतलब एक 20 वाला ऐसा नहीं दिखेगा। इवन टीनेजर भी ऐसा नहीं दिखेगा, लड़का हो या लड़की हो, कुछ भी हो, उसके हाथ में आपको वेप जरूर दिखेगा।
तो मैंने भी 2022 में, क्योंकि एकदम ट्रेंड चल रहा था और तब ज्यादा पता नहीं था वेब के बारे में।
तो मैंने भी एक खरीदा। मुझे लगा कि मैं एक दो हफ्ते करूंगा, अच्छा लगा तो ठीक है भाई। एक दो हफ्ते एंजॉय हो गए, बाकी ये खत्म तो हो ही जाएगा, फिर फेंक देंगे।
उसके बाद तो नहीं करूंगा। मैंने दो हफ्ते करा, वह चलता रहा। फिर मैंने एक और लिया। फिर वो पूरे महीने करा।
तो बहुत ही मजे आने लग गए। फिर उसके बाद मैं दो महीने किया। फिर उसके बाद तीन महीने किया। वो तीसरे महीने में जब मेरे को रिलाइज हुआ कि मैं रोज कितना कितना वेप कर रहा हूं।
इवन दो लोग कहते हैं कि सिगरेट से कम डेंजरस है। लेकिन एटलीस्ट सिगरेट में लोग ये तो करते हैं कि अपने घर के नीचे, ऑफिस के नीचे जाते हैं फिर स्मोक करते हैं।
या चलो अगर वो अपने घर पे भी रखते हो, तो एटलीस्ट बालकनी में तो जाते हैं। अपने कमरे में तो कोई नहीं फूक होता भाई काम करते-करते मैं ऐसे-ऐसे वेप कर रहा था।
वेप किया, काम किया, वेप किया, काम किया, पूरा दिन। और फिर तीसरे महीने में ना मेरे को सर में दर्द होना शुरू हो गया। मेरा पेट खराब हो गया।
क्योंकि इतना वो गंदा जो उसमें फ्लेवर होता है, वो अंदर जा रहा था। अब यहां पे आई एम आल्सो प्रिटी श्योर कि जितना बाकी लोग या आपके दोस्त वगैरह करते होंगे, मैं उतना नहीं कर रहा था।
बट यार, इवन थोड़ा सा भी करना मेरे को तो बहुत मेरे को ना एडिक्शन से बहुत अ घिन आती है। कि मैं किसी चीज से एडिक्टेड नहीं होना चाहिए।
ये चीज कैसे मुझे रूल कर रही है, मैं इस चीज को अपने जूते के नीचे रखूंगा ना। तो मेरे को तो वो वाली भी मोरल प्रॉब्लम भी होती है।
बट एनीवे तीसरे महीने में जब मुझे रिलाइज हुआ कि ब्रो, ये तो बहुत ही गंदी चीज है, तब मैंने जान जान के सारे नेगेटिव आर्टिकल्स पढ़ लिए ऑनलाइन वेब के बारे में।
मेरे दिमाग में डर बैठ गया। सबकॉन्शियस लेवल पे फीड हो गया। ये बहुत इंपोर्टेंट तरीका बता रहा हूं किसी भी एडिक्शन से निकलने का।
सबकॉन्शियस लेवल पे फीड हुआ पड़ा था। तो मैंने फिर छोड़ दिया। उसके बाद अब का ऐसा सीन है कि अगर मैं दो हफ्ते में एक बार या महीने में एक बार कहीं पार्टी पे जा रहा हूं।
वहां पर अगर किसी दोस्त के पास है, तो मैं ज्यादा से ज्यादा एक दो पफ ले लूंगा, देखने के लिए ऐसे। मतलब सोशली, एंड दैट इज इट।
नेक्स्ट एक बहुत इंपोर्टेंट मिस्टेक अ वो यह है कि मैं 25 की एज के बाद मुझे ऑनेस्टली एक्टिवली सर्च करना चाहिए था एक रिलेशनशिप।
मुझे इतना पैसिवली नहीं लेना चाहिए था उस चीज को। आपने मेरे instagram2 इयर्स का जब मैं हो चुका था। जब मेरा प्री फ्रंटल कॉर्टेक्स अच्छे से बन चुका था। जब मेरे को अ समझ आ गया था कि भाई अब क्या-क्या करना है।
एटलीस्ट उस टाइम पे तो मुझे लगता ही था कि मुझे उस मीडिया कंपनी में ही जॉब करनी है। तो तब मैंने क्यों नहीं एक्टिव एफर्ट शुरू करे।
एंड इन एनी केस 25 इज अ गुड एज जिसके बाद तुम ये भी, चाहे प्रोफेशनली तुम एकदम क्रेजी नहीं हुए पड़े, एकदम सक्सेसफुल नहीं हुए पड़े।
लेकिन तब भी तुम ये चीज साइड बाय साइड कर सकते हो। तुम अब बच्चे नहीं हो। वैसे अगर आप 25 से नीचे की एज के हो, तो आप नेक्स्ट पॉइंट पे जा सकते हो। वो बहुत इंपोर्टेंट पॉइंट है बट मेरे 25 से ऊपर वाले ब्रोज, नीचे कमेंट जरूर करना कि आप इस चीज में एक्टिव हो या इनएक्सेल।
बस सोच रहे हो कि कुछ चमत्कार हो जाएगा। यू रियली हैव टू बी ऑन डेटिंग एप्स और मीट फ्रेंड्स ऑफ फ्रेंड्स।
एंड एवरीथिंग हैज टू बी विद द इंटेंशन कि भाई डेट करना है। अब ये लौंडा लपा पंती नहीं करनी है। अब ये कैजुअल रिलेशनशिप्स नहीं करने हैं, अब चाहिए एक अच्छी रिलेशनशिप, एक स्टेबल रिलेशनशिप।
क्योंकि जब हम लोग 32, 33 के हो जाएंगे, तब तो हमें खुद ऐसा लगेगा ना कि भाई अब शादी तो करनी ही करनी है।
तो उस टाइम पे मैं एटलीस्ट अपने लिए तो ये नहीं चाहता कि मेरे को बहुत इनऑफ कोई ढूंढना पड़ रहा है। फिर उसके साथ एडजस्ट करना शुरू करना पड़ रहा है।
मैं वो चीजें इतनी लेट नहीं करना चाहता अपनी लाइफ में। अगर स्टार्टिंग से ही इफ यू हैव अ स्टेबल रिलेशनशिप और एक गर्लफ्रेंड है। जिसके साथ आप सब कुछ एडजस्ट कर पा रहे हो, एक अंडरस्टैंडिंग बन पा रही है।
जिस चीज में भी आपको कॉम्प्रोमाइज करना है, उसको कंप्रोमाइज करना है, वो स्टार्टिंग में ही हो रहा है। उसके बाद ये वाली सारी चीजें होती हैं जिसमें और लोग इंवॉल्व होते हैं।
फॉर एग्जांपल व्हेन यू टर्न 31, 32, 33 शादी वादी हो रही है, कुछ भी हो रहा है तब वो चीजें ऑर्गेनिक बन जाती हैं।
ना, तब आपको वो मेहनत नहीं लगती। तो मैं बस इतना कह रहा हूं। आगे की जो मेहनत है उसको स्प्रेड आउट करके जल्दी शुरू कर दोगे तो वो आसान लगेगी।
एनीवे चलते हैं नेक्स्ट गलती पे। और मेरे को अभी रिलाइज हो रहा है कि मेरी जो ये गलतियां है इतनी यूनिक हैं। इतनी अजीब, इतनी अजीब लगेंगी आपको। अब जितनी भी गलती आ रही है, आपने ये गलतियां कहीं और नहीं सुनी होंगी।
क्योंकि और कोई ये गलतियां कर नहीं रहा होता। मैंने वो वाली गलतियां नहीं करी जो मैं ऑलरेडी बुक्स में पढ़ चुका था ऑथर्स की। या फिर कोई सक्सेसफुल इंसान के वीडियोस देख चुका था, पॉडकास्ट देख चुका था।
वो सारी गलतियां मैंने उनकी गलतियां सुन के ही अवॉइड कर दी। ना, तभी तो हम गलतियां। तभी तो आप ये वीडियो देख रहे हो ताकि आप मेरी वाली भी गलतियां अवॉइड कर लो।
तो मतलब आपको उसी रीजन से लगेगा कि ये गलतियां कितनी अजीब हैं। क्योंकि नेक्स्ट गलती जो मैंने करी वो ये है कि मैंने रात के 2 बजे के बाद मस्ती ढूंढने की गलती करी।
देखो सिंपल सी बात है, रात को पहले ये रूल होता था कि रात को 12:00 बजे के बाद कुछ भी अच्छा नहीं होता। रात को 12:00 बजे के बाद अगर आपके दिमाग में क्वेश्चन आ रहा है कि मुझे ये करना चाहिए, वो करना चाहिए, फिर घर जाके सो जाना चाहिए।
उसका आंसर हमेशा घर जाकर सो जाना चाहिए होता है। ठीक है, हमेशा।
लेकिन अभी का ऐसा सीन है कि अब ऐसी दुनिया बन चुकी है कि वो जो 12:00 बजे वाला सिस्टम था वो अब 2 बजे पे शिफ्ट हो चुका है।
2 एम अब मेरा मानना है कि 2 बजे के बाद कुछ भी अच्छा नहीं होता। लेकिन उसके लिए मैं निकलता भी घर से लेट हूं। अगर मेरे को रात को मस्ती मारनी होती है तो यहां पे कवि कहना चाहते हैं कि रात को समझ लो।
मैं अगर अपने घर से 11:30 बजे निकला हूं दोस्तों से मिलने के लिए, मस्ती मारने के लिए। चाहे वो क्लबिंग करना हो, चाहे वो कहीं पे खाना पीना हो।
चाहे वो गेड़ी वाले दोस्त खैर हैं नहीं। मेरे अ वो चीज, मेरे को गेड़ी वाले दोस्त मेरे कभी बन नहीं पाए। क्योंकि मेरे को वो अपनी लाइफ से स्किप करना पड़ा।
दैट इज वन थिंग आई हैड तो सैक्रिफाइस टू बिकम सक्सेसफुल। बट एनीवे अभी मैं क्लबिंग वगैरह जाता हूं या फिर रात को कुछ भी मस्ती की मस्ती का सीन हो ना वो 12:00 बजे से लेकर 2:00 बजे तक इंटरेस्टिंग होता है।
कहीं पे भी, शायद आपका, आपके शहर में अगर चीजें जल्दी बंद होती हैं। तो शायद वो चीज 11 से एक होगी या फिर 10 से 12 होगी। होती वो दो घंटे की विंडो है।
दो घंटे की ही वो विंडो होती है जिसमें मजे होते हैं, उसके अलावा कुछ मजे नहीं होते। अगर आपको 2 बजे के बाद भी मजे करने हैं, तो या तो आपको इतनी ज्यादा अल्कोहल पीनी पड़ेगी कि आपकी बॉडी खराब हो जाए।
एंड ओबवियसली अल्कोहल पीना टू द लेवल कि आपकी बॉडी खराब हो। आपको कोई भी मेडिकल दिक्कत हो, मैं कभी रिकमेंड नहीं कर सकता। मैं नहीं, मैं खुद नहीं करता।
आप नहीं चाहते आप करो। आप करते हो तो आप हो। बट मेरी बात एकदम मानो भाई। अगर आप कहीं पार्टी वार्टी प भी हो, आप मजे कर चुके हो।
आपने थोड़ी सी अल्कोहल भी पी ली, एक दो ड्रिंक्स, उसके बाद आपको मजे भी आ गए, आप नाच भी लिए। और अब 2 बजे उस पार्टी से हाउस पार्टी या फिर क्लब या जो भी जगह है बाहर।
वहां से निकल के आप ये सोचते हो कि भाई अब दोस्तों के साथ कि अब क्या करें, अब क्या करें, और मस्ती चाहिए हमें। तो और मस्ती चाहिए, हमारी गांड में और मस्ती डाल दो।
हम इसीलिए तो बाहर निकले। अरे अगर आपको और मस्ती चाहिए तो आप ये सोचते हो कि चलो अ चलो दूसरे क्लब ना जाए।
अगर एक तो पहली बात तो दूसरे क्लब जाओगे, वहां पे फिर से बोर होगे। क्योंकि आपकी उतर चुकी होगी और आप क्योंकि सिर्फ अल्कोहल के भरोसे नाच रहे थे।
तो आपको और अल्कोहल चाहिए होगी और आप अपनी बॉडी खराब कर लोगे। अगर आप बिना अल्कोहल के भी नाच पाते हो जैसे मैं नाच पाता हूं।
तो भी आपको दूसरे क्लब जाने तक आपकी एक्साइटमेंट हो चुकी होगी। कोई फायदा नहीं हुआ दूसरे क्लब जाने का। अगर आप नाचने गाने के बाद कहीं खाना खाने भी गए हो।
या फिर आप कभी क्लब गए नहीं थे। आप तो बस भाई के साथ बाहर निकल के आ दोस्तों के साथ बाहर निकल के मोमोज खाने गए थे।
अब सोया चाप खा रहे हो। अब चाय पी रहे हो। अब ये कर रहे, तो उसके बाद नेक्स्ट जगह जब आप जाओगे, आप ये सोचो आप फालतू का अपना कैलोरी इंटेक बढ़ा रहे हो।
और रात को सारे अनहेल्दी खाने मिलते हैं। तो आप गंदी कैलोरीज भी ले रहे हो। तो आपका नुकसान ही नुकसान है। 2 बजे के बाद।
प्लस यहां पे एक प्रो टिप और दे दूं। अगर आप दोस्तों के साथ गए हुए हो ना, उनको बिना बताए निकल लिया करो। जब आपका मन करता है। शुरू में गालियां देंगे, उसके बाद कोई गालियां नहीं क्योंकि सब मान लेते हैं।
ये तो ऐसा ही है फिर सब एक्सेप्ट कर लेते हैं। डरो मत, कोई दोस्ती ही नहीं तोड़ेगा आपसे। मैं हमेशा से यही करता हूं। मेरे दोस्तों को नफरत है मेरी इस एक्टिविटी से।
लेकिन मैं तो यही कंटिन्यू करूंगा। मेरा ऐसे दोस्त नाच रहे होते हैं, मैं बीच में से बोर हो जाता हूं। पीछे खिसक हूं, अपनी कैप बुक करता हूं और गायब हो जाता हूं। बैटमैन की तरह भाई।
क्योंकि भाई मेरे को मेरी मेंटल हेल्थ सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है। और यही है मेरी अगली गलती कि मैंने अपनी 20 के इनिशियल पार्ट में अपनी मेंटल हेल्थ बिल्कुल इग्नोर कर दी।
मुझे उस टाइम पे ऐसा लगता था कि अगर मैं फिजिकली स्ट्रांग हूं और बहुत ज्यादा हार्ड वर्किंग हूं तो भाई सब ठीक है ना। मतलब मेंटल हेल्थ क्या होती है, जब दुख हो तो एक्स्ट्रा काम कर लो।
लेकिन मेरे को बहुत ज्यादा लेट समझ आया कि अंदर से स्ट्रांग रहना शायद ज्यादा इंपॉर्टेंट है। और तब मैंने शुरू करी पॉजिटिव सेल्फ टॉक।
मतलब मैंने खुद को समझाना शुरू किया कि यू कैन डू इट। इवन इफ यू डोंट सक्सीडेंस। अगर तू बिजनेस में फेल भी हो जाता है, ऐट लुक ऐट कितनी सारी चीजें हैं, जिसके लिए तू खुश हो सकता है।
मम्मी, पापा, बहन, दोस्त, तो दुखी होने की जरूरत नहीं है। तू जिम जा सकता है, बॉडी बना सकता है। इतनी सारी चीजें हैं जिसकी ज से तू खुश हो सकता है।
ओबवियसली मैं यह नहीं कह रहा कि बस हल्की फुल्की बॉडी बना के, मम्मी पापा के साथ हा ही करके, एक चौद सी लो वैल्यू गर्लफ्रेंड बना के तुम लाइफ में खुश हो जाओ, चंद पैसे कमा के।
नहीं, मैं यह नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं कि तुम्हें दुखी होने की जरूरत नहीं है।
प्लस यहीं पर मेरी सेल्फ अवेयरनेस की भी जर्नी शुरू हुई। जब मेरे को समझ आया कि ब्रो मैं कौन हूं, मैं क्या फील करता हूं, कौन सी चीजें मुझे क्या फील करवाती है।
उसी से समझ आता है ना कि यार लाइफ में आगे क्या करना चाहिए। चाहे वो बिजनेस हो, चाहे वो नौकरी हो, चाहे वो रिलेशनशिप्स हो, चाहे वो कुछ भी हो।
जब तक तुम खुद के साथ अकेले बैठ के बात नहीं करोगे ना, तुम्हें कुछ समझ नहीं आएगा।
इस चीज के लिए मैंने बहुत इंपोर्टेंट चीजें शुरू करी थीं, इस चीज को फिक्स करने के लिए और बहुत प्लान चीजें थीं। बहुत स्ट्रेटिजिकली करी थीं मैंने।
और आई एम रियली प्राउड ऑफ माय सेल्फ फॉर डूइंग दिस। सुबह जल्दी उठना, टाइम से उठने के क्योंकि तब कोई शोर नहीं मचा रहा होता।
जिम जाना, टाइम से जिम के अंदर किसी से बात नहीं करनी। मेरे को मेरे को कोई जिम पार्टनर नहीं चाहिए। मैं सिर्फ अपने आप से बातें करते करते वर्कआउट करता हूं।
उसके बाद मैं पहले का जो मेरा जब मैंने काम किया था अपनी मेंटल हेल्थ पे काम करने का तब 2021 में मैं जिम से आने के बाद बुक पढ़ता था।
आधा पौना घंटा आराम से बैठ के क्योंकि तब कुछ कोई बिजनेस कुछ था नहीं मेरे पास। तब तो बुक पढ़ के मुझे समझना था कि बिजनेस सेटअप कैसे करूं।
एंड उसके बाद रात को मैं एक घंटा लेता था जिसमें मैं स्किन केयर करता था। टीवी देखता था, अकेला बैठ के अपने रूम को लॉक करके।
वो जो अकेले रहने के तीन-चार घंटे हैं ना ब्रो। वो इतने इंपॉर्टेंट हैं। और मेरे रूटीनस ओवर द इयर्स जितने भी चेंज हो जाए, एक चीज जो बिल्कुल भी चेंज नहीं होती वो है मेरा वो टाइम।
जब मैं अपने आप के साथ अकेले बैठता हूं और मैं समझता हूं कि मैं अपने आप से पूछता हूं कि भाई तू क्या फील कर रहा है, क्या करना चाहता है।
अभी जो तू फील कर रहा है, उसको और स्ट्रक्चर कर। ऐसा क्यों फील कर रहा है। तो मैं अपने आप का थेरेपिस्ट बन जाता हूं।
एंड आई थिंक मैंने अपने किसी कंटेंट में पहले भी ये बताया हुआ है कि इस साल के स्टार्टिंग में मेरे को बर्न आउट हो गया था।
मेरे को थोड़े से पैनिक अटैक्स आने शुरू हो गए थे। क्योंकि मैंने कुछ ज्यादा ही वो अर्बन नीड्स तब नया-नया शुरू किया था। तब सेटअप करना बहुत मुश्किल हो रहा था।
मुझे समझ नहीं आ रहा था भाई ये सब चीजें चलती कैसे हैं। क्योंकि बाकी बिजनेसेस स्लो स्लो ग्रो कर सकते हैं। मेरे तो सामान बनाने से पहले इतनी डिमांड रेडी थी कि मैं जीरो से शुरू नहीं कर कर सकता था भाई।
तो मेरे लिए तो बहुत ही मुश्किल हो गया था यार। तो उस टाइम पे मैंने थेरेपी भी शुरू करी थी जिसने बहुत ज्यादा हेल्प किया था।
व्हिच आल्सो रिमाइंड्स मी मैं इस पे एक अलग से वीडियो भी बना दूंगा। कि थेरेपी कैसे लेनी चाहिए, क्यों लेनी चाहिए।
क्योंकि बहुत लोगों को अभी भी 99.99% लोगों को अब भी लगता है कि थेरेपी लेना तो बहुत गलत बात है। किसी को बता नहीं सकते। ये सब मैं आपको क्लियर एक अलग से वीडियो में बता दूंगा।
लेकिन एनीवे रियलाइफ केयर एक्सटर्नली नहीं, इंटरनली भी बहुत इंपॉर्टेंट है। मैंने लास्ट कुछ महीनों में अपने रूटीन में कुछ टूल्स ऐड किए हैं जो मुझे काम और सेंटर्ड फील करने में हेल्प करते हैं।
जैसे मैंने आपको मेरे डेली रूटीन वाले वीडियो में कैमोमाइल टी का भी बताया था। एंड अभी कुछ वीक्स से मैं अश्वगंधा भी रिसर्च कर रहा था।
जो कि स्ट्रेस रिड्यूस करने में, फोकस इंप्रूव करने में हेल्प करता है। एंड इस पे साइंटिफिक स्टडीज भी प्रूव हो चुकी हैं।
और साइंस तो मुझे। और इसीलिए अपने रिलैक्सेशन, बेटर स्लीप और इनर सेल्फ को वेल बीइंग देने के लिए मैंने लेना स्टार्ट कर दिया अश्वगंधा।
अब जितने भी अवेलेबल ऑप्शंस थे, उनमें से आई वांटेड कि मैं नेचुरल प्योर एंड इफेक्टिव सप्लीमेंट ही लूं। जिसमें बिल्कुल भी कोई फिलर्स या फिर केमिकल्स ना हो।
और यहीं पे मेरे एक दोस्त ने रिकमेंड किया था अश्वगंधा ए 43 फ्रॉम कोष वेदा। भाई ये बढ़िया नेचुरल सप्लीमेंट है। जिसके अंदर प्योर अश्वगंधा है। व्हिच इज फाइव टाइम्स मोर पोटेंट देन रेगुलर अश्वगंधा।
आल्सो भाई इट डंट हैव एनी साइड इफेक्ट्स। ये इजली कंज्यूम कर सकता है कोई भी एज ग्रुप और क्योंकि मम्मी पापा को भी दे सकते हैं।
तो मैं सोच रहा हूं मम्मी को स्ट्रेस एंजाइटी तो होती है। तो बढ़िया है, उनको नींद अच्छी आ जाएगी दे देता हूं उनको भी।
बट एनीवे अगर आप भी अपने मेंटल हेल्थ और रिलैक्सेशन को प्रायोरिटी देना चाहते हो तो कोष वेदा का अश्वगंधा ए 43 जरूर ट्राई कर सकते हो। इसका लिंक मैं नीचे डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगा।
एंड ओबवियसली भाई डिस्काउंट कोड भी देगा आपको। एनीवे आते हैं नेक्स्ट मिस्टेक पे जो कि ये जो मैंने हुडी पहनी हुई है स्ट्रेंथ हुडी।
सबसे ज्यादा लोग पहनते हैं जिम में और यह भी शायद जिम से रिलेटेड मिस्टेक है। वो यह है कि मैंने अच्छा खासा पार्ट ऑफ अपना 20 निकाल दिया।
बॉडी डिस्मोरफिक, भी लोग जिम जाते हैं। उनको पता है बॉडी डिस्मोरफिक स्टोरी। बताता हूं इस चीज की।
जब मैं स्कूल में था, तब मैं मोटा था। और आप में से अगर कोई पहले मोटा था। या अभी भी मोटा है, तो उसको ये जरूर रिलेट कर पाएगा।
कि हम जब भी बैठते हैं चेयर पे, तब हमेशा ऐसे करके बैठते हैं कि जो फैब्रिक है वो हमारे बूबस और हमारे पेट के बीच में दब के पूरी बॉडी की शेप ना ले ले।
तो मोटे लोगों में जरूर होता। तो मैं स्कूल में जब भी बैठता था, तो बैठते हुए ऐसे ऐसे करके बैठता था और बैठे-बैठे भी मैं ऐसे झुक के बैठता था। ताकि फैब्रिक आगे की तरफ गिर के मेरे बॉडी के कर्व्स को छुपा ले।
क्योंकि अगर ऐसे बैठता, सीधा होके तो यहां से मेरे पूरे मोटापा दिख जाता। जो कि मैं नहीं चाहता था जब मैं मोटा था।
तो इसीलिए बचपन से मैं काफी अपनी बॉडी को पसंद नहीं करता था। ऐसा नहीं है कि मैं इतना हेट करता था। कि मैं वो लोगों की तरह जो मेंटली थोड़े से हिले हुए होते हैं। जो कट्स वट्स मार रहे हैं कि आई हेट माय बॉडी।
नहीं, ऐसा नहीं था बट हाँ, मतलब मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं थी अपनी बॉडी। इवन उसके बाद जिम जाने के बाद भी, हमेशा मैं यही रता रहता था कि भाई उसकी बॉडी मेरे से बेटर है, उसकी बॉडी मेरे से बेटर है।
तो उसकी वजह से मैं हमेशा यही मानता था। कि मेरी बॉडी तो सबसे बकवास है। और कभी भी जिम में घुस के मेरे से पूछोगे कि यहां पर कोई ऐसा इंसान बताओ जिसकी बॉडी आपसे गंदी है, मेरे पास कभी आंसर नहीं होगा।
मैं हमेशा कहूंगा कि मेरी सबसे गंदी बॉडी है पूरे जिम में। लेकिन फिर मेरे को धीरे-धीरे रिलाइज हुआ।
और हां, मैं अब ये नहीं बोलने वाला कि नहीं बस इतना खुश रहो कि तुम्हारे हाथ पैर काम कर रहे हैं। कई लोगों के हाथ नहीं होते, पैर नहीं होते।
एटलीस्ट हमारे नहीं वो। वो सब ठीक है, वो सब तो ग्रेटफुल है मेरे अंदर बट। मेरे को यह गलती एक तो सॉल्व करने की जरूरत क्यों थी।
क्योंकि भाई फालतू का दुख क्यों मचाना है? जान जान के दुखी क्यों होना है? जिम जाना कर्तव्य है, बॉडी बनाना कर्तव्य है, एक्सरसाइज करना कर्तव्य है, बन जाएगी भाई।
ये थोड़ी ना सोचता रहूंगा कि भाई बॉडी नहीं बन रही मेरी। तो बॉडी बहुत गंदी है मेरी, तो बॉडी बहुत गंदी है मेरी। लॉजिकली अगर मैं सोचूं तो मैक्स टू मैक्स ये सोच सकता हूं कि हां ठीक है भाई, शायद मेरे को बाइसेप्स और हैवी मारनी चाहिए।
कि भाई ताकि मेरी बाइसेप्स और बड़ी बन जाए। इसमें भी मैं एक्सपेक्ट नहीं कर सकता कि इतने टाइम तक 1 इंच गेन होएगा। उतने टाइम तक 1 इंच और गेन होएगा।
मुझे उन सब में, क्योंकि मैं प्रोफेशनल भी नहीं हूं। वैसे भी हम में से कोई भी प्रोफेशनल नहीं है।
बट इन एनी केस मेरे को धीरे-धीरे रिलाइज हुआ कि ब्रो, तुम्हें बॉडी मिली है, उसको ट्रेन करने में खुश हो। उस बॉडी के रिजल्ट्स पे खुश मत हो।
तुम इस चीज पर खुश हो कि मेरी स्ट्रेंथ कितनी बढ़ गई। इस चीज पे दुखी मत हो कि भाई उसका डोला ज्यादा बड़ा है। मेरा डोला कम है।
और इस चीज पे खुश भी मत हो कि भाई मेरा डोला ज्यादा बड़ा है। और उसका डोला कम है। इट डज नॉट मैटर। एक पॉइंट के बाद।
अगर तुम्हारी वी शेप सही है, तुम्हारी बैक इज वाइड इनफ, तुम्हारा पेट नहीं निकला हुआ है ज्यादा। मेरा अभी थोड़ा सा पेट निकला हुआ है।
मैं उसको अभी क्योंकि अक्टूबर, नवंबर में मैंने थोड़ी सी ज्यादा दारू पी ली थी। क्योंकि पार्टी ज्यादा हो गई थी, थोड़ा पेट आ गया।
उससे पहले एब्स दिख रही थी ऊपर की दो। बट ऑल दिस इज ओके। मतलब एक पॉइंट के बाद जब वी शेप मिल चुकी है, शोल्डर्स ठीक-ठाक हो चुके हैं, आर्म्स ठीक-ठाक हो चुके हैं।
उसके बाद इट डजन मैटर, उसके बाद एवरी टाइम अभी भी जिम रेगुलरली जाना है। मतलब अभी भी वर्कआउट रेगुलरली करना है।
बट फोकस ऑन थिंग्स दैट एक्चुअली मैटर। फ्लेक्सिबल, मोबिलिटी, स्ट्रेंथ, एंडोरेंस, एजिल। ये चीजें मैटर करती है।
ये नहीं मैटर करता कि शीशे में दो भाई खड़े हैं, ओ देख तेरा डोला इतना, ओ देख मेरी चेस्ट इतनी।
मेरे को तो सबसे गंदा लगता है जो लोग टाइम वेस्ट करते हैं जिम में। वर्क आट करने के बाद आधा-आधा घंटा पौना पौना घंटा जिम के शीशे में बॉडी देख रहे हैं।
अगर तुम कंपीट नहीं कर रहे, अगर तुम प्रोफेशनल नहीं हो। तो तुम इतना टाइम वेस्ट करने का अफोर्ड कैसे कर सकते हो?
हां, उन लोगों को मैं मानता हूं जो कि खानदानी इतनी दौलत से आते हैं। कि उनको लाइफ में कुछ काम ही करने की जरूरत नहीं है। तब तो तुम यार तुम्हें तो लाइफ एंजॉय करनी चाहिए।
लेकिन जो हमारे जैसे लोग हैं, भाई तुम क्या कर रहे हो जिम में? लास्ट सेट के बाद, फटाक से कूल डाउन स्ट्रेचिंग करके कटो वहां से।
बट एनीवे मेरे को धीरे-धीरे रिलाइज हुआ कि भाई जो बॉडी है, बढ़िया है। कोई दिक्कत नहीं है। मेरे को कोई क्रेज ऐसी बॉडी चाहिए नहीं।
कि मैं नंगी फोटो डाल के उसम लाइक्स लूं। क्योंकि अपनी बॉडी दिखाते हुए फोटो डालना कहीं ना कहीं सिमिलर टू हो सकता है।
जिन लड़कियों को हम नफरत करते हैं, आप और मैं, जो बॉडी दिखा के लाइक्स ले रही होती हैं।
तो शायद सेम कैटेगरी भी हो सकती है। आई नॉट गिवन इट अ वेरी डीप थॉट बट मेरे को अगर सोशल मीडिया प भी डालना है ना।
तो मेरे को लोगों से ना लाइक्स लेने हैं। उनकी हेल्प करके, सिर्फ और सिर्फ उनकी हेल्प करके। मेरा और कोई एम नहीं है।
तो जब कोई जरूरत ही नहीं है मुझे दुनिया की बेस्ट बॉडी बनाने की। अगर मैं टॉप पर परसेंटाइल में रह सकता हूं, तो बस मैं उतने प खुश।
मुझे अपनी बॉडी देख के दुखी नहीं होना। नेक्स्ट जो मैंने गलती करी है वो ये है कि काश मैंने सोलो ट्रेवलिंग जल्दी शुरू कर दी होती।
अब भाई इसकी सीधी सी बात यह है कि मेरे को पर्सनली ट्रेवलिंग बहुत पसंद है। मेरे हिसाब से जब मैं सोलो ट्रेवल करता हूं, तब मेरे दिमाग के पर्दे खुल जाते हैं।
मैं शांत हो जाता हूं, मेरे दुख खत्म हो जाते हैं। मेरे थॉट्स जो इधर-उधर से लड़ रहे होते हैं, एक दूसरे से वो शांत हो जाते हैं।
अ मैं और ज्यादा क्रिएटिव बन जाता हूं। तो यह मेरे साथ हमेशा पॉजिटिव चीजें होती हैं ट्रेवलिंग की वजह से।
तो इसीलिए मैं बोल रहा हूं कि काश मैंने जल्दी शुरू की होती। तो शायद मैं जल्दी स्टेबल हो चुका होता। लाइफ में अपने थॉट्स के लिए और मैं शायद जल्दी सक्सेस हो जाता।
बस ये पूरा शायद, शायद पे ही बेस्ड है। और प्लस मुझे ऐसा भी लगता है यार।
मतलब मुझे तो लाइफ में मैक्सिमम ट्रेवल करके ही मरना है। भाई मेरा तो एक ही हॉबी है, एक ही शौक है ट्रेवलिंग। मेरे पास और कोई शौक ही नहीं है।
लोगों के शौक होते हैं गिटार, स्पोर्ट्स, लड लसन, हजार टाइप के शौक होते हैं। मैं जब ट्रेवल नहीं कर रहा, मैं सिर्फ काम कर रहा हूं।
एक एक हॉबी है मेरी, छोटी सी क्लबिंग। वो भी आधे पने घंटे में बोर हो जाता हूं। लेकिन ट्रैवल है मेरी असली हॉबी।
तो मेरे को तो मैक्सिमम करना है। तो मैं बस ये सोच रहा हूं कि पहले का टाइम आलस करने की जगह मैं ट्रेवल ही कर लेता।
हां तब पैसे नहीं होते पास ज्यादा ट्रेवल करने के। तो छोटे ट्रेवल कर लेता। मतलब तीज के अंदर मैं किसी पहाड़ पर जाके तो ट्रेवल कर ही सकता था।
तो अगर आप अभी भी सोच रहे हो ना करूं या ना करूं, करूं या ना करूं, प्लीज स्टार्ट सोलो ट्रेवलिंग। आप हमारा सोलो ट्रेवलिंग वाला वीडियो भी देख सकते हो। उस मैंने आप क्लीयरली समझाया हुआ है कि क्यों जरूरी है और कैसे करते हैं।
नेक्स्ट एक जो गलती मैंने करी। और इंडिया का हर 20 यर ओल्ड यह गलती जरूर करता है। उसको यह लगता है कि वह अपने पेरेंट्स को चेंज कर सकता है।
अब इवन दो, मैं मानता हूं कि आई एम वन ऑफ दोस वेरी फ्यू पीपल जो अपने पेरेंट्स को एक्चुअली में चेंज कर पाया है।
बट स्टिल, मैं वो भी चेंज सिर्फ 10 पर ही कर पाया हूं। मतलब तुम भूल जाओ कि तुम पेरेंट्स को कोई पाठ पढ़ाओ ग, उनको कोई वैल्यू सिखाओ ग और वो वो सीख जाएंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
अब जाके पिछले जब मैं 10 साल, 5 साल से मम्मी को एक स्पेसिफिक चीज बोलता रहता हूं, उनको समझाता रहता हूं कि अ, कि स्ट्रेस नहीं लेते, आप अपने मेंटल हेल्थ पे ध्यान दो।
ये करो, वो करो। तब जाके मम्मी अब अब जाके बोलना शुरू किया है हां, मुझे लगता है थोड़ा-थोड़ा तो संचित की बातों का इफेक्ट मेरे दिमाग पे होता है।
कि मैं और पॉजिटिव फील करती हूं अपने बारे में। व्हिच इज ग्रेट। मतलब मुझे तो लगता है उससे बड़ा सक्सेस मेरे लिए लाइफ में कुछ नहीं हो सकता।
बट इन जनरल भाई, तुम जितना टाइम स्पेंड करोगे ना मम्मी पापा को चेंज करने का, उतना टाइम अगर तुम खुद पे काम करके और कुछ फोड़ दोगे ना।
तो वो चेंज करने की जरूरत नहीं बचेगी। अब यहां पे ना मैं तुम्हें 10 तरीके की पार्ट पढ़ा सकता हूं। बट मैं तुम्हें मैं सिर्फ एक चीज बोलना चाहता हूं।
तुम्हारे मां-बाप के बारे में भाई, वो भी लाइफ पहली बार ही जी रहे हैं। वो भी 20 में थे एक ही बार, वो अभी अपने 50 या 60 में हैं।
तो पहली बार वो भी एक इंसान है जो अपनी लाइफ पहली बार। वो वो भी सब कुछ पहली उनके आसपास भी पहली बार सब कुछ हो रहा है।
उनको नहीं समझ आ रहा भाई बैच क्या हो रहा है। मेरा बच्चा सुट्टा क्यों मार रहा है? मेरा बच्चा दारू क्यों पी रहा है?
मेरा बच्चा लौंडियाबाजी क्यों कर रहा है? उनको भी नहीं समझ आ रहा, उनकी गांड फट के हाथ में आई पड़ी है।
वो सामने से नहीं दिखाते तुम्हें। क्या लगता है जब तुम्हारा बाप तुम्हें मारने आता है। बेल्ट बेल्ट निकालता है।
अब तो शायद नहीं होता होगा ये बट जब तुम छोटे हो गए या फिर कुछ हाउसहोल्ड्स में होता भी होता। जब वो मारने आता है तो अंदर क्या सोच रहा होता है?
तूने गलती करी है, चल ठीक है, मार देता हूं। फिर मुझे मारने में तो मजे आते हैं। नहीं, ये नहीं होता, उसके अंदर से गांड फटी पड़ी है।
भाई वोही सोच रहे हैं, इसने ये गलती कर दी भाई अब मैं क्या करूं? इसके तो मार्क्स बहुत कम आए। इसकी तो लाइफ खराब हो जाएगी। भाई, मुझे नहीं समझ आ रहा मैं क्या करूं?
चलो मार ही देता हूं। वो ये होता है, वो मतलब गलत है, मारना आई अग्री। लेकिन भाई उस आदमी को कुछ समझ नहीं आ रहा है।
तुम्हारी मम्मी जब तुम पर चिल्लाती है। मार्क्स नहीं आ रहे, पढ़ाई नहीं कर। उनको भी कुछ समझ नहीं आ रहा है।
मैं क्या करूं? बहनचोद पड़ी है।
तो तुम बस इसी चीज पे एंपैथी लाओ। कि वो भी पहली बार जी रहे हैं। और इसीलिए उनसे चीजें एक्सपेक्ट करना छोड़ दो।
नहीं चेंज होंगे, वो नहीं करेंगे चीजें तुम्हारे हिसाब से। तुम अपने आप पे ध्यान दो। तुम अपने आप को इतना बढ़िया कर लो।
हर स्फीयर में कि वो तुम्हें कुछ बोल ही ना पाए। मेरी मम्मी मुझे लास्ट ईयर तक रो-रो के आंसू बहा बहा के बोलती थी। बेटा एमबीए कर ले। तेरी लाइफ बर्बाद हो जाएगी।
एमबीए कर ले, प्लीज। एमबीए कर ले। अब मैंने ऐसी जगह प पहुंच के उनको दिखा दिया। जो कि मैं एमबीए करके भी कभी नहीं पहुंच पाता।
जितने मेरे दोस्त एमबीए कर रहे हैं। और मैं नहीं चाहता कि ये वाला पार्ट कहीं भी। तो मेरा सारा टाइम वहीं चला जाता। रोने दो यार अपने पेरेंट्स को चेंज करने की कोशिश गलती से ही मत करना।
उतना टाइम खुद की डेवलपमेंट पे डालो। और डेवलपमेंट से ही आते हैं। नेक्स्ट एक बहुत बड़ी गलती पे। मैंने कभी भी अब स्किलिंग पे ध्यान नहीं दिया अपने फर्स्ट हाफ ऑफ 20 में।
अब मुझे पता है कि आप कहोगे हा। अब स्किलिंग ही नहीं करी, मैं तो कर रहा हूं। अरे भाई तू youtube0 वीडियो देखता है। मेरे पास उस टाइम पे ये, उस टाइम पे ऐसे कोई क्रिएटर्स नहीं थे जो बोलते थे कि भाई अपने आप को स्किल अप कर लो।
यह स्किल सीख लो वो स्किल सीख लो। बहुत ही कम थे। इतना वायरल नहीं होता था वो कंटेंट। तो मेरे को कभी पता ही नहीं चला कि भाई मेरे को स्किल्स बढ़ानी है अपनी।
इसलिए मैंने अपनी लाइफ में कोई स्किल ही नहीं बढ़ाई। अगर मुझे पहली जॉब में पता होता कि स्किल बढ़ा के मैं क्या-क्या कर सकता हूं, तो मैं शायद भाई कहां ही पहुंच जाता।
भाई जॉब में मेरी सैलरी क्या ही हो जाती।
बट देखो, मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा, तब भी कुछ ऐसे लोग थे। जो कि ऑनलाइन कोर्स करके सीख के स्किल्स वो चीज कर रहे थे।
तो ऐसा नहीं है कि वो पॉसिबल नहीं था। बाकी लोग कर रहे थे और मैं सिर्फ इस चीज को बहाना नहीं बना रहा हूँ कि भाई मेरे को रील्स नहीं दिखी, स्किल करने वाली, तो इसलिए मैंने स्किल नहीं सीखी।
मतलब ये नहीं कह रहा तो बहुत बेवकूफी हो जाएगी बट तभी तो मैं उसको अपनी गलती कह रहा हूं कि मैंने रियलाइफ सीख के मैं कितना ऊपर पहुंच सकता हूं यार।
मेरे साथ वाले थे जिन्होंने हम एक सप्लाई चेन का प्रोजेक्ट कर रहे थे। उन्होंने कोई डेल्टा सिक्स सिग्मा सर्टिफिकेशन।
डेल्टा सिग्मा पता नहीं क्या कुछ। उन्होंने ऐसी सर्टिफिकेशन करी। एक छ महीने का कोर्स होता है शायद वो कर लिया उन्होंने।
उसके बाद उनको एक प्रमोशन मिल गया। अभी प्रमोशन हुआ था। और कुछ महीने बाद फिर से एक और प्रमोशन मिल गया।
इवन तो मेरा भी पहले साल के बाद डबल प्रमोशन हुआ था। बट मेरे उस डबल प्रमोशन के बाद उस जने को उसका भी डबल प्रमोशन हुआ था।
उसके बाद उसके तीन महीने बाद एक और प्रमोशन मिल गया उसको। तो मतलब बाकी लोग ये कर रहे थे। मैंने नहीं किया।
मुझे रिलाइज नहीं हुआ कि इससे मेरे को फायदा क्या होगा। क्योंकि मैं अपना टाइम स्पेंड करता था चिल मारने में।
कि भाई नौकरी खत्म हो गई। शाम को अपने काम से वापस आए, अब क्या करेंगे, अब चिल मारेंगे यार, टीवी देखेंगे।
अगर मैं स्किल सीख लेता तो शायद बहुत ऊपर होता। बट ऐसा भी नहीं है कि आगे जाके मैंने अपनी गलती नहीं रिलाइज करी।
मतलब मैंने पहले चार साल तो नहीं करी अपनी चारों साल जो मैंने नौकरी करी है, उसमें तो मैंने कुछ खास स्ल अप पे नहीं करी। अब मैं हंस रहा हूं।
बट रोने वाली बात है ये। बट फिर उसके बाद जब फट गई, जब नौकरी नहीं थी मेरे पास। जब खुद का बिजनेस चलाना था, तब तो सारी स्किल खुद ही सीखनी पड़ी।
भाई, तब तो फटी हालत में सीख ही ली। अब आता हूं मेरी नेक्स्ट गलती पे। अ ये पहली वाली गलती से भी थोड़ा सा लिंक्ड है।
और वो ये है कि मैं डिसीजन मेकिंग में ना कुछ ज्यादा ही टाइम लेता हूं। ये भी एक और गलती है जो मैंने अभी तक उतने अच्छे से फिक्स नहीं करी है।
मेरे सामने कोई डिसीजन आता है ना, मैं वही। क्योंकि डरपोक हूं। इसलिए मैं सोचता रहता हूं कि यार ये करूं या वो करूं? नहीं, मुझे और डटा चाहिए।
समझने के लिए, मुझे और लोगों से बात करनी पड़ेगी कि क्या डिसीजन लूं? मेरी हेल्प करो ये करो। और मैं ना बस उसको और।
मैं ये बहाना मार देता हूं। कि भाई नहीं अभी तो मैं अपने दिमाग में स्टोर करके, आई विल स्लीप ऑन इट। अबे स्लीप ऑन इट। एक रात के लिए होता है।
कि एक रात को तुम रात को सो जाओ और सुबह उठ केर डिसीजन ले लो। ये नहीं होता, एक एक महीने तक डिसीजन ही नहीं लिया जा रहा भाई।
क्योंकि डरपोक हूं। क्योंकि मेरे को डर लगता है कि डिसीजन गलत हो गया, तो क्या होगा? क्योंकि बहुत कुछ एट स्टेक हो गया।
अब मैं उस पॉइंट प हूं भी नहीं ना कि व डू आई हैव टू लूज? आई हैव अ लॉट टू लूज। बट तब भी डिसीजन मेकिंग स्लো नहीं होनी चाहिए।
एंड हो सकता है कि आप में से काफी लोगों के लिए यह मिस्टेक रिलेटेबल ना हो। क्योंकि तुम ऐसे पोजीशन पे नहीं हो अभी।
पॉइंट पे नहीं हो अपनी लाइफ में, जहां पे तुम्हारे लिए डिसीजन मेकिंग इज ए बिग थिंग।
बट ट्रस्ट मी, जितनी जल्दी इसको बस दिमाग में रख लोगे ना कि आगे जाक कोई डिसीजन तुम्हारे सामने आए तो जल्दी लेना है।
तो तुम्हारी बहुत हेल्प होगी क्योंकि जेफ बीजस भी मैंने उनका एक पॉडकास्ट देखा था। जो उसकी जगह फोकस ऑन मेकिंग मोर गुड डिसीजंस।
राद देन फोकसिंग ऑन मेकिंग वन बेस्ट डिसीजन। बट इस पर मैं ज्यादा बात नहीं करूंगा। क्योंकि मुझे पता है कि ये अभी के लिए रिलेटेबल होगा ही नहीं, मैक्सिमम लोगों के लिए।
बट एक चीज जो बहुत रिलेटेबल और एक अच्छी सीख हो सक। लेसन हो सकता है, वो नेक्स्ट मिस्टेक है मेरी। कि मैं हर बार एक एंथिया अपॉर्चुनिटी नहीं बन पाता।
अब अपॉर्चुनिटी का क्या मतलब होता है? कि कोई अपॉर्चुनिटी सामने आई तो फटाक से वो अपॉर्चुनिटी पकड़ ली।
तो जैसे कि मैंने बहुत सारे ऐसे लोग देखे हैं कि वो अपॉर्चुनिटी ही ऐसे ढूंढते रहते हैं। और फट से अपॉर्चुनिटी पकड़ के उसपे खेल जाते हैं।
और फिर सक्सेसफुल हो जाते हैं। मैं ना थोड़ा सा आलसी भी हूं और थोड़ा सा डिसीजन मेकिंग भी स्लो है मेरी।
आपको पता ही है तो मैं हर अपॉर्चुनिटी पकड़ता नहीं हूं। सिर्फ ये सोच के कि कौन करे भाई। तो मतलब पकड़ भी लेता हूं मैक्सिमम अपॉर्चुनिटी ऑनेस्टली।
लेकिन मैं कभी भी उस बार में एंथू सिस्टिक नहीं होता। मतलब मैं कभी खुशी से अपॉर्चुनिटी नहीं पकड़ता।
अब अपॉर्चुनिटी पकड़ने का एग्जांपल देता हूं। आपने हमारे अर्बन ईड्स के शर्ट गिफ्ट करी थी?
और वो ऐसे नहीं हुआ था कि बादशाह ने आके बोला था कि भाई टीशर्ट दे दे। ओबवियसली ऐसा नहीं हुआ था। इवन तो मेरी बादशाह से डीएम पे बात होती है।
लेकिन वो ऐसे हुआ था कि एक youtube1 क्रिएटर बुलाए थे में। जो हमारा सॉलिट्यूड वाला डिजाइन है, उसमें बादशाह की एल्बम का नाम लिखवा दिया।
मैंने कहा लेके तो जाएं, देखें क्या होता है। वहां गया, कुछ भी करके जुगाड़ लगा के। बिल्कुल पीछे पड़ पड़ के, पीछे पड़ पड़ के, आगे वाली रो में, एकदम बादशाह के सामने वाली सीट पे बैठ गया।
और उसके बाद जब वो बादशाह क्वेश्चंस आंसर कर रहा था क्राउड के तब, एकदम से स्टेज पे चढ़ गया।
और फिर उसके बाद, उसके बाद हटाएंगे थोड़ी ना। फिर मैंने दे दी टीशर्ट। फिर उसके बाद बादशाह ने तारीफ भी करी टीशर्ट की।
तो भाई, इसको कहते हैं अपॉर्चुनिटी का फायदा उठाना। ऐसे ही हम गुजरात के चीफ मिनिस्टर से मिलने गए गए थे। पूरा, उन्होंने हमारे लिए पूरा प्रबंध किया था।
गरबा एंजॉय करने का। उस टाइम पे भी मैंने उनको एक अर्बन ट् की टीशर्ट गिफ्ट करी। कोई ऐसा थोड़ी ना था कि उन्होंने मांगी थी।
ऐसा थोड़ी ना था, किसी ने अप्रूव करी थी। मैंने अपनी पैंट के अंदर छुपा के अंदर चला गया।
और और कुछ ना कुछ करके बार-बार उसको जो वहां पे ऑर्गेनाइजर बंदी खड़ी थी। और हम चीफ मिनिस्टर के सामने बैठे हैं। हम 15 या 20 क्रिएटर वहां पे।
उसको मैंने ऐसे एक बार बोल ना, एक बार बोलना। और उसके बाद वो लड़की भूपेंद्र भाई पटेल जो चीफ मिनिस्टर हैं, उनको बोल ही रही थी कि ये अप्रिशिएट करते हैं कि आपने हमें यहां बुलाया है।
इनका एक क्लॉथिंग ब्रांड है। इतनी देर में मैं चीफ मिनिस्टर के साइड में खड़ा था। टीशर्ट खोल के लेके।
कि ये लो टीशर्ट। मेरे को अपॉर्चुनिटी का फायदा उठाना था। मैंने उठा लिया। अब नाउ द थिंग इज, मैं हर बार नहीं कर पाता।
अगर मैंने 10 मेरे सामने अपॉर्चुनिटी आएंगी, मैं उनमें दो ही कर पाता हूं। बाकी आठ में चलो तीन चार और कर लूंगा। टोटल पांच ही कर पाता हूं।
बाकी पांच में, ऐ हो जाता हूं। मैं नहीं करना। तो ये नहीं होना चाहिए। ऐसा मेरे साथ ऑफिस में भी होता था।
कि कोई अपॉर्चुनिटी आई है, अच्छी। कि कोई तुम्हारा मैनेजर तुम्हें एक अच्छा प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट देना चाहता है।
जो करने के बाद तुम काफी शानदार तरीके से लोगों की नजर में आ जाओगे। वो वाला प्रोजेक्ट, सिर्फ इसलिए छोड़ देना। कि यार मैं नहीं, मेरे को ना घर जा के।
मैं प्योर परसेप्शन पे ही काम कर रहा था। जब मैं जॉब कर रहा था। जिसका मतलब यह है कि मैंने उस एडवाइस को, जो कहते हैं ना शो योर वर्क।
कि तुम अपना काम नहीं दिखाओगे। तो किसी को पता नहीं चलेगा। उस एडवाइस को मैंने इतना सीरियसली ले लिया।
कि मेरे को काम की क्वालिटी से फर्क ही पड़ना छोड़ गया। मैं सिर्फ इतना फोकस कर इस पर फोकस करता था। कि जो मैंने काम किया है, वो मेरे मैनेजर्स, मेरे सीनियर्स को कैसा लग रहा होगा?
कि वोह मेरे काम के बारे में क्या बोलेंगे। और मैं ये भूल जाता था कि भाई काम भी तो अच्छा होना चाहिए।
काम में भी तो कुछ सॉलिड होना चाहिए। तो मैं फालतू की चीजों पर फोकस करता था सिर्फ। उन्हें खुश करने के लिए।
च ओनली च इज इंपोर्टेंट। आल्सो, मतलब तुम्हें अपना काम दिखाना भी आना चाहिए। बट उससे पहले तो काम की क्वालिटी भी अच्छी होनी चाहिए ना।
तो उससे पहले मेरी फर्स्ट जॉब में मेरी काम की क्वालिटी बहुत अच्छी थी। बट मेरे सेकंड जॉब में क्योंकि एनवायरमेंट भी ऐसा बना दिया था।
कि भाई बस दिखना चाहिए कि तुम कुछ कर रहे हो। और उस चीज की वजह से आई थिंक आई आल्सो बिलीव।
कि वो सिर्फ मेरी गलती नहीं है। वो उस कंपनी की भी गलती है कि एनवायरमेंट ही खराब बनाया हुआ था।
लेकिन तब भी आई शुड हैव फोकस मोर ऑन कि मैं क्वालिटी वर्क करूं। नॉट बिकॉज़ कि उस कंपनी को कंट्रीब्यूट कर पाऊं, ओनली बिकॉज़ कि मैं कुछ सीख पाऊं और आगे अपनी लाइफ में लगा पाऊं।
और इसीलिए सबसे बड़ी प्रॉब्लम मेरे साथ ये हो गई। कि वो जो मैंने सेकंड जॉब करी थी। मीडिया कंपनी में, वहां से मैं कुछ भी नहीं सीखा हूं।
मेरे लिए वो टाइम वेस्ट निकला, कुछ नहीं सीखा मैं वहां पे। तो फायदा ही क्या हुआ? फिर तो मैं आपको बस ये एडवाइस देना चाहता हूं।
कि जब भी आप काम करते हो, तो ये मत सोचो लोग क्या सोचेंगे। आप ये सोचो कि काम की क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए।
और ये सोचो कि इस काम की क्वालिटी दिखनी चाहिए किसी को। भी।
इन जनरल भी आपको कोई भी इंसान क्या सोचेगा कि यह बेटर है, वो बेटर है। वो भी नहीं सोचना चाहिए।
और यही है अगली गलती जो मैं करता था। बहुत टाइम तक करी। मैंने वो है कंपेयरिंग माय सेल्फ टू अदर्स।
भाई, अपनी लाइफ किसी से भी कंपेयर करके आपको सिर्फ, सिर्फ एंजाइटी और स्ट्रेस ही मिलेगा।
क्योंकि अगर लाइफ किसी से अच्छी चल रही होगी, तो आप यह सोचोगे कि भाई कब मेरे हाथ से ये लाइफ स्लिप हो जाएगी।
और कभी गंदी चल रही होगी किसी से, तो आप हमेशा ये सोचोगे कि यार उसकी लाइफ कितनी बेटर है, मुझे तो उससे नफरत है।
और भाई ये कंपैरिजन वाली चीज भी अगेन, मैं जिस तर से पला बड़ा हूं। मेरा बचपन जैसा रहा है।
मेरे मां-बाप ने मुझे जैसा पाला है, उसकी वजह से ही आई। कि भाई हमेशा ही कंपीटेटिव था मेरे घर में।
तो कि भाई तुम्हें बेस्ट बनना ही है। तुम्हें उससे बेटर करना है। तुम्हें उससे बेटर करना है।
तुम्हें उससे बेटर करना है। तो उस चीज की वजह से एक तरीके से हेल्प हुआ कि मैं कंपीटेटिव एग्जाम क्लियर कर पाया।
चाहे दूसरी बार में ही कर पाया हं। बट वो चीज मेरे दिमाग से कभी गई नहीं। मैं हमेशा अपने आप को कंपेयर ही करता था।
कि मेरे को इससे बेटर करना है। मेरे को इससे बेटर करना है। मेरे को उससे बेटर करना है।
तो इवन जब मेरी नौकरी भी लगी और मेरी वो नौकरी नहीं लगी जो मुझे चाहिए थी। ववन तो तो बहुत बढ़िया नौकरी लगी बट मुझे और भी बेस्ट वाली चाहिए थी।
जो मेरे कॉलेज की एकदम बेस्ट नौकरी हो, मेरे को वो चाहिए थी। क्योंकि मुझे लगता था मैं डिजर्व करता हूं।
मेरे को बहुत बाद में एक्चुअली रिलाइज हुआ कि मैं कभी डिजर्व करता ही नहीं था वो। मतलब मैं नहीं हूं उस टाइप का जो उतनी बढ़िया नौकरी कर पाता। और जिन्होंने वो नौकरी करी मैं उनको बहुत रिस्पेक्ट कर पाता हूं अब कि भाई तुम सच में डिजर्व करते थे।
मैं नहीं डिजर्व करता था मैं तो। बट एनीवे मेरी फर्स्ट जॉब में भी मैं हमेशा अपने आप अपनी लाइफ को कंपेयर करता रहता था।
उन लोगों की लाइफ से जो कि अच्छी वाली कंपनी, जो मेरी ड्रीम कंपनी में चले गए थे।
और मुझे हमेशा लगता था यार उनकी लाइफ कितनी बेटर है। वो पैसे भी ज्यादा कमा रहे हैं। हैं देखो उनकी कंपनी कितने मजे करवा रही है। उनको वो किसी को बताते हैं कि हम इस कंपनी में हैं।
तो चौड़ मचती है। तो मैं बहुत कंपेयर करता था और फिर हमेशा ही दुखी रहता था।
हमेशा, हमेशा इस बारे में हमेशा। मैं इनसिक्योर फील करता था। दुखी नहीं रहता था। इनसिक्योर फील करता था उन दोस्तों से मिलना भी छोड़ दिया।
क्योंकि मुझे लगता था यार इनसे मिलके फिर मैं दुखी फील करूंगा कि मुझे लगेगा कि मैं बिल्कुल ही बेकार हूं।
फिर उसके बाद, जब मैं मीडिया कंपनी में शिफ्ट हुआ। 2 साल बाद, तो वहां पे भी उस टाइम तक मेरे जो स्टार्टिंग वाले दोस्त थे।
जो अच्छी कंपनीज में गए थे, वो और भी अच्छी कंपनी में शिफ्ट हो गए थे। और मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि यार मैं ये क्या ही कर रहा हूं।
मैं शायद डाउनग्रेड। मेरी एक तो 1 थड हो गई थी यहां पे आके। क्योंकि स्टार्टअप था। तो वो स्टार्टअप वाले कहते थे कि भाई हमारे पास पैसे नहीं है देने के।
और मैं चूं की तरह मान भी गया कि ऐसे स्टार्टअप में जाऊ, वो स्टार्टअप था भी नहीं ठीक है। नॉर्मल कंपनी थी।
वो कुछ स्टार्टअप नहीं था। उसके अंदर कोई टेक स्टार्टअप होता। वहां पर मैं अपनी सैलरी कम करवाता। तो बात भी बनती।
भाई, मेरे तो शेयर्स भी उन्होंने पूरे नहीं दिए। चलो अब तो क्या ही पोल खोलूंगा। बट एनीवे वहां का भी मैंने आपको एक इंसिडेंट बताया हुआ है।
कि जब मेरा एक कॉलीग मेरे से बेटर परफॉर्म कर रहा था। तो मैं अपने आप को उससे इतना कंपेयर करता था कि मैं बाथरूम में जा जा के रोता था।
अब सुन के तो बड़ा ऐसा लगता है यार। क्या कर रहा था मैं भाई। ब बट ये सब कंपैरिजन की वजह से ही तो है। जो मैं दुखी रहता था।
कंपैरिजन एक पॉइंट तक सही है। जब तुम्हें वो और हार्ड वर्क करने पे मोटिवेट करता है।
बट जहां पे वो चीज तुम्हें दुखी कर रही है ना, वहां पे कंपैरिजन गलत है। और कंपैरिजन इन जनरल हार्ड वर्क भी प्रमोट करने के लिए ना।
उतना ही काफी होता है कि तुम खुद से खुद को कंपेयर करो। और यही मैंने किया। जब मैं अपने आप पे काम करना शुरू किया।
जब मैंने अपने बिजनेस खुद बिल्ड करना शुरू किया। तब मेरा कंपैरिजन सिर्फ अपने आप से ही था। इस टाइम पे भी मेरा कंपैरिजन सिर्फ अपने आप से है।
मुझे अब ऑनेस्टली ये चीज मैंने इतनी अच्छी तरीके से कंकर कर ली है। को घंटा फर्क नहीं पड़ता किसी से कंपैरिजन में।
कोई मेरे ज्यादा अमीर है हो जाए, भाई। मुझे सिर्फ अपनी हैप्पीनेस पर फोकस रखना है।
मुझे सिर्फ अपनी खुशी से फर्क पड़ता है। मुझे किसी और की लाइफ से नहीं फर्क पड़ता। मेरा कंपटीशन सिर्फ मैं हूं।
मेरे को सिर्फ इतना फर्क पड़ता है कि आज मैंने इतना काम किया है। यह रिजल्ट निकाला है।
तो बाद में दो महीने बाद, एक साल बाद, मैं सेम नंबर ऑफ आवर्स पुट इन करके। क्योंकि वो घंटे तो नहीं बढ़ा सकता।
मैं दिन के उतने घंटे लगा के रिजल्ट टू टाइम्स कमा रहा हूं, 10 टाइम्स कमा रहा हूं या नहीं कमा रहा।
कि आज मेरा मेरे दोस्तों से, फैमिली से या किसी भी रिलेशन ऐसा है। तो इसके बाद मेरा रिलेशन अच्छा हो रहा है या



